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कविता

अकेलापन
आरेला लासेक्क


उसने अपनी माँ का दूध पिया,
अपनी पत्नी का मांस खाया
और अपने बच्चों के भेजे जला दिए
फिर भी वह अपने अकेलेपन की थाह नहीं नाप पाया।

उसका घर जब बारिश की गोद में चढ़ गया,
उसकी जमीन घिर गई पत्थरों से
वह हमेशा अपनी सुनाई कहानियों में राजा होता था,
यही सौभाग्य था
उन दैत्यों का जो यहाँ नीचे रहते थे

 

अनुवाद - अर्चिता दास & मिता दास

संपादन - रति सक्सेना

 


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