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कविता

संभवतः
श्रीप्रकाश शुक्ल


संभवतः एक मौलिक शब्द है जिसे जोड़कर किसी को भी कहीं भी मौलिक बनाया जा सकता है

इसके लिए किसी प्रभाव की जरूरत नहीं होती गो कि यह स्वयं में प्रभाव है

इसे किसी अनुवाद की दरकार नहीं जो स्वयं ही अनुवाद है

जहाँ कहीं भी कुछ जगमगाहट दिखे
कांपता हुआ दिखाई दे कोई तथ्य
या कि अपनी अनगढ़ता में ही सही
कोई संवेदना लड़खड़ाती हुयी उठने की कोशिश करे
संभवतः की याद् आती ही है

यह हमारी भाषा का एक ऐसा शब्द है जो तनी रीढ़ के साथ खड़ा हो सकता है
और दे सकता है एक ऐसा आधार जिसमें हमारे अविश्वास के लिए कोई जगह ही न हो !

यह बाहर से नरमदिल है लेकिन भीतर से सख्त दिल
जो हर संभव को संभव बनाता हुआ असंभव कीं सारी धूर्तताओं को
धूल चटाता रहता है

हमारी संस्कृति में इतिहास को चुनौती देने वाला खुद में संभवतः
संभवतः अकेला शब्द है
जो इतिहास के किसी भी तथ्य को झुठला सकता है

इतिहास में जब जब परिवर्तन हुए हैं
जब जब इतिहास को नए तथ्यों की जरुरत महसूस हुयी है
यह संभवतः ही है जिसने संभव किया है
मनुष्य के लिए एक नया इतिहास !


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