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कविता संग्रह

अलंकार-दर्पण
धरीक्षण मिश्र

अनुक्रम 15 एकावली अलंकार पीछे     आगे

लक्षण (दोहा) :-
जहाँ विशेष्‍य विशेषण माला देत बनाय।
छोड़ल पद गहि जात तब एकावली कहाय॥
 
उदाहरण :-
अइसन विद्वान विद्वान ना कहाई यदि
कविता सुनावे कवि मंच पर जाय ना।
ऊ ना ह कविता सुनावल जे सुनि करके
श्रोता समूह धीरज खो के उबियाय ना।
ऊ ना उबियाइल कहाई जो भविष्‍य में भी
कवि और कविता के नाम से धिनाय ना।
ऊ ना ह कवि और कविता के घिनाइल जो
गारी देत कवि के पण्‍डाल से पराय ना॥
 
खूँटी ऊँखि कैसे बा बवाल होत फागुन में
जैसे बे छपैले कविताई भैल भार बा।
कैसे बे छपैले कविताई भैल भार बाटे।
लड़की सयान जैसे घर में कुँवार बा।
लड़की सयान बाटे घर में कुवार कैसे
बी.ए. पास बेटा जैसे घर में बेकार बा।
बी.ए. पास बेटा कैसे घर में बेकार बाटे
मुर्दा के जैसे केहु ना उठौनिहार बा॥
 
कैसे छोट डोंगिन में बाटे अग्नि बोट बड़ा
जैसे सब कोर्ट में सु्प्रीम हाईकोर्ट बा।
कैसे सब कोर्ट में सुप्रीम हाईकोर्ट जैसे
सजी योग्‍यता से बड़ी योग्‍यता ई वोट बा।
कैसे सजी योग्‍यता में वोट बड़ी योग्‍यता बा
जैसे हथियारन में बम के विस्‍फोट बा।
कैसे हथियारन में बम के विस्‍फोट जैसे
भारी सब भोज बीच ई सजन गोट बा॥
 
ऊ ना कविताई उच्‍च कोटि के कहाई जे के
भारी नामधारी केहु कवि जी बनायी ना।
ऊ ना नामधारी भारी कवि जी कहाई कबे
मंच पर जाके तानसेनी जे देसाई ना।
ऊ ना तानसेनी हवे यदि कवि मंच पर
अपना के सबको से बढि़ के जनाई ना।
ऊ ना कवि मंच में गनायी जेके मुख्‍य कवि
पूरा पेट पीके कवि मंच पर आयी ना॥
 
ऊ ना पूरा पीयल हवे यदि पियवैया के
मंच से उतारे के चारि मिलि टेकावे ना।
ऊ ना टेकावल कहाई यदि धा के ओहि में
जा के संयोजक हाथ आपन लगावे ना।
ऊ ना हवे धावल जो माइक के तार गोड़े
फँसि के दुचार डेग आगे घिसियावे ना।
ऊ ना घिसियावल कहाई जो सभापति का
गोड़ से एकाध बून खून बहवावे ना॥
 
 


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