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कविता संग्रह

अलंकार-दर्पण
धरीक्षण मिश्र

अनुक्रम 23 निरुक्ति अलंकार पीछे     आगे

लक्षण (वीर) :-
प्रचलित अर्थ नाम के तजि के जहाँ नया कुछ अर्थकहात।
निरुक्ति नाम के अलंकार तब उहवाँ बाटे मानल जात॥
 
उदाहरण :- बी.पी. का न अयोध्‍या में बा रामचंद्र के चिन्‍ह देखात।
ना उनके कुछ शिला लेखबा आ ना बा झण्‍डा फहरात॥
कइसे रामजन्‍म के धरती पुरी अयोध्‍या मानल जाय।
बी.पी. का विश्‍वास योग्‍य ना इहवाँ कवनों चिन्‍ह देखाय॥
जे माड़ा के जनमल बाटे ओकरा माड़ा परी जरुर।
तब ओकरा कइसे कुछ लउकी गायब रही आँखि के नूर॥
 
चौपई :- अमर कोष बतलावत बात। अहिर बुध न बा भइल सुनात॥
अथवा अहिर बुध्‍न्‍य अर्थात। बुद्धिन अहिर का साथ सुहात॥
अहिर बुद्धि से लेत नकाम। एसे अहिर बुध्‍न्‍य शिव नाम॥
रबड़ छन्‍द:-
जेकरा जनम होते होत माया देवी से साथ छूटि गइल
ओकरा दालि आ तरकारी किनाई कइसे।
घर में शुद्धोदन बसिया परल बा किंतु
ऊ खाये के काम में आई कइसे।
जेकरा घर के ईहे हालि बा
ऊ घर के झमेला में परी का?
आनन्‍द का साथ यशोधरा पर ना फइलायी।
त दोसर करी का ?
 
सवैया :- यह देवरिया अरिया है पड़ा पिछड़ा जिला है यह माना हुआ।
कभी नाम रहा इसका भी बड़ा तगड़ा पर एक जमाना हुआ।
फिर से इसके अब भाग्‍य जगे इसे आप का जो अपनाना हुआ।
सुधि लेना सुधाकर धा करके जो कृपा करके यहाँ आना हुआ॥
मुवाई ना आप मुवाइना में हमहूँ तब जा के पढ़ाई इहाँ।
पढि़ के हम टाइप मास एकाध उपाधि बेकाम के पायीं इहाँ।
इसकूल देहात में गाँव में बा जनि सीटी के बात चलायीं इहाँ ।
हमरो अस टीचर राखीं एगो सगरे बिटिये न बुलायीं इहाँ॥
 
कवित्त :-
भरत ननिहाल से आ गैले ई हाल पा के
मन्‍थरा प्रसन्‍नता से मन में धधा गइल।
हमरे करत भरत पौले ईराज बाड़े
पावे के इनाम भारी आसा बड़ी छा गइल।
अत: आने इनाम चली पूरा सिंगार क के
गहना झुलावत गतर पूरा गंथा गइल।
बाली के कान धड़ ऊ अंगद के बन्‍हले
सुग्रीव के कपावत तुरन्‍त उहाँ आ गइल॥
 
दोहा :- पढ़े लोग अति चाव से जेके एके बार।
भोजपुरी में बा उहे कहल जात एकबार॥
जे बियही खाली हवे ऊ ना पूछत जात।
भइल बिये सी जे हवे ऊहे इहाँ रखात॥
जिसको लख बाजार की बस्‍तु समस्‍त पलाय।
सपलाई अफसर वही मेरी है यह राय॥
हिन्‍दू का जड़ कोड़ कर जो फेंकेगा दूर।
वह है हिन्‍दू कोड बिल कौंसिल में मशहूर॥
ना कहि के फिर थू कहें और कहें फिर राम।
जिसका सुन कर नाम वह सचमुच नाथू राम॥
मार और शाला कहें जहाँ विगड़ कर लोग।
मार्शल ला का उस जगह शासक करें प्रयोग॥
थोरे मिले दहेज पर रहे अधिक की चाह।
समधी भरते आह तब उसको कहें बिआह॥
जगत सृष्टि के विषय में मिथ्‍या मिथ्‍या बात।
मिथ्‍या लाजी नाम से हुई जगत विख्‍यात।
होम रूल में क्‍यों न हो तारतम्‍य का होम।
मंदिर के छत को कहें अंग्रेजी में डोम॥
ओमें यदि कुछ ना मिलल एमे ले तनखाह।
काम करऽ सरकार के बनल रहऽ खरखाह॥
मने करे जर को कभी खर्च करो मत व्‍यर्थ।
शब्‍द मनेजर का यही उर्दू में है अर्थ॥
मने-मने जरता रहे देखि पराया दोष।
अर्थ मनेजर का यही देता हिंदी कोष॥
इन्‍सपेक्‍सन का के जरा इधर उधर टर जाय।
इन्‍सपेक्‍सन के नाम से वही पुकारा जाय॥
टन्‍टा रहे विसाहता सुने न सिख की बात।
असिस्‍टैन्‍ट के नाम से जग में वह विख्‍यात॥
जिसके हूँ में हूँ सभी जोरें हों मजबूर।
उस प्रभाव युत युक्ति को कहते लोग हुजूर॥
रहे कमीशन में सदा अकसर करे न काम।
कमी यही उसमें अत: मिला कमिश्‍नर नाम॥
सो सो कर जो टी पिये दिन में बारम्‍बार।
उस सोसाइटी को मिला गन्‍ने पर अधिकार॥
सान फ्रांस सिसको नगर किया यही सब पास॥
* * * *
पा न सकें कुछ पास , मू न सकें लड़ के वही।
जा न सकें तजि आस, वही पान मुन जान है।
कोई हो अभियोग ले के सक्‍सेस ही रहे।
जहाँ अमेरिकी लोग वही लेक सक्‍सेस नगर॥
 


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