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कविता संग्रह

अलंकार-दर्पण
धरीक्षण मिश्र

अनुक्रम 31 परिवृत्ति अलंकार पीछे     आगे

 
लक्षण (सार) :-
दुइ मनई का बीच परस्प)र बस्तु< जहाँ बदलाला।
अलंकार परिवृत्ति नाम के उहवाँ मानल जाला॥
या
नीमन बाउरकम अधिक बस्तुा जहाँ बदलात।
कवि कल्पित बदलाव ऊ बस परिवृत्ति कहात॥
 
उदाहरण (सार) :-
बिस्मिल्ला ह मिलल बी.पी. का श्री गणेश के दे के।
एमें मिलल मुनाफा उनका केवल मात्रा ए के॥
दूसर विनिमय मियाँ बुखारी का साथे जब कैले।
सादा लोटा दे के बधना सींग सहित पा गैले॥
बी.पी. एक बफोर्स नाम के घटना जब उपरौले।
तब नमक मिर्च ओइ में लगाइ के तिल के ताड़ बनौले॥
आ ओ घटना के दोष सजी राजीवे के अपिर्त कैले।
आ राजिव से बड़की कुरूसी ले प्रधान बनि गैले॥
तीनू बेर मुनाफा पा के मन में अति अगरैले।
सिंह मुलायम का साथे तब बुद्धि के विनिमय कैले॥
इनके बुधि ले सिंह मुलायम केतनो पाप कमैले।
तवनों पर अपना कुरूसी पर अब तक ले रहि गैले॥
बी.पी. सिंह मुलायम का बुधि के प्रयोग जब कैले।
एको बरिस न बीतल बड़की कुरूसी से ढि़मिलैले॥
मंत्र देवतगन पढि़ के माला पशु का गर में डारें।
कोमल कवर एकाध खिया के ओकर प्रान निकारें॥
 
दोहा :- रावण का दरबार में दुइ भुज दण्डs प्रहार।
करि के पवले बालि सुत मुकुट शत्रु के चार॥
कुबरी कुमति पढाइ के पवलसि प्रबल प्रहार।
फूटल मुँह दँतवा सहित कूबर और कपार॥
खेती बारी में कृषक तुच्छर बस्तु॥ दे खाद।
पावत बहुत अनाज आ फल परि पूरित स्वाुद ॥
नाम देवता के सुना हरत पशुन के प्रान।
ई भारी गुरू दक्षिणाई बलिदान बिधान॥
निशिचर सब कपि पोंछि पर दिहल तनिक अंगार।
कपि कइले पूरा नगर आगी के भण्डालर॥
राम धाम निज भेजिके तारा के प्रिय पीव।
बदला में कम कीमती दिहले पति सुग्रीव॥
* * * *
ईश्व*र से नर निज नश्वलर तनु हाड़ माँस के पावेला।
जेहि में रोग अनेक धरेला और बुढा़पा आवेला।
बदला में नर ईश्वकर के पत्थ र के देहि बनावेला।
जेहि में जरा मरन ना आवे रोग न कबें सतावेला॥
 
सवैया :-
प्रति पाँचवाँ वर्ष चुनाव का खर्च में लाख करोड़ लगावत बानीं।
मँहगाई चुनाव का बाद बढ़े तब ओकर बोझ उठावत बानीं।
कुरुसी पै चढ़ा अपना धन से कुछ के हम राज भोगावत बानीं।
मतदान के पा अधिकार एगो एतना बदला में गँवावत बानीं॥
 
 


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