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कविता संग्रह

अलंकार-दर्पण
धरीक्षण मिश्र

अनुक्रम 09 अनुप्रास अलंकार पीछे     आगे

लक्षण (दोहा) :- एक वर्ण के आवृत्ती होखे बारम्‍बार।
अलंकार अनुप्रासतब होत उहाँ उजियार॥
 
उदाहरण :- ब्राह्मण बत्‍सवंशी बास बाटे बरियारपूर।
पूरब लमकुही का प्रान्‍त सरेवार ह॥
 

वृत्ति अनुप्रास अलंकार

उदाहरण (सवैया) :-
जेकरा के जे काम दियात जहाँ करते उहाँ वृत्ति विकास रहे।
कबे आगे रहे कबे पाछेरहेकबे साथी का साथ में वास रहे।
दुइ बार कहीं कई बार कहीं करते जो अकेलो प्रयास रहे।
घरे ऐसन होखे सवांग जहाँ नित वृत्‍यनुप्रास रहे॥
 
दोहा :- बारम्‍बार विकास हित करत सवाँग प्रयास।
तब ओही परिवार में होत वृत्ति अनुप्रास॥
 

श्रुति अनुप्रास अलंकार
उदाहरण (सवैया) :-
एक ही घर से अलगे-अलगे पइसा जो बाजार में जात रहे।
सबका अलगे अलगे सुरती बढि़याँ तनि तेज किनात रहे।
सुरती में सदा मन लागत हो भलहीं घरे कार बिलात रहे।
सुरती घटि जा पइसा न रहे तब तीसी चोरा के बिकात रहे॥
अथवा जब आपन आपन ती सुर ती राम पूजल जात हवे।
सपनों में कबे श्रीमती सबके न रती भर बात टरात हवे।
कबे बात का बात में बात कटे त अठान कठान डरात हवे।
सुरता सुरती के रहे घेरले तब श्रुत्‍यनुप्रास कहात हवे॥
दोहा :- सुरती खारित दाम जब अपना अपना पास।
राखे लगे सवाँगतब होला श्रुति अनुप्रास॥
 
छेकानुप्रास अलंकार
उदाहरण (सवैया) :-
हमरा ससुरारि के गाइ हवे होतना हउ खेत हमार हवे।
हउ बाछा हवे हमरे कोसिला एको पाई ना ओमें तोहार हवे।
सब छेंके सभे अपने कहि के तनिको मन में न बिचार हवे।
तब छेकानुप्रास के ओ परिवार में होत सही अवतार हवे॥
 
दोहा :- जे से जेतना हो सके छेंके जर जाजात।
उहाँ छेक अनुप्रास के दरसन होत छछात॥
 
लाटानुप्रास अलंकार
 
उदाहरण :-
छेकानुप्रास होते होते भय सबका मन से भागेला।
धोती खुँटिया लाठा लाठी आपुस में होखे लागेला॥
कतहीं कुछ तोड़-फोड़ होला कतहीं कुछ चीज लुटा जाला।
लाटा अस सब लटिया जाला लाटा अस सभे कुटा जाला॥
माटा अस सब लपआ जाला भोंपा अस सभे बन्‍हा जाला।
के बा कहवाँ ना खोज पूछ सतुवा अस सभे सना जाला॥
केहु मारे में बाजी मारे केहु कुछ अधिका गरिया देला।
तब गाँव नगर के पंच लोग आके झगरा फरिया देला॥
 
दोहा :- यदि लठिधर कमजोरना , पंच दियाई पद सजी।
यदि लठिधर कमजोर , ना पंच दियाई पद सजी॥
* * * *
देहिन पर लाठी के निशान खेतन पर लाठा के निशान।
जब हो जाला तब हो जाला लाटानुप्रास के हऽ प्रमान॥
 
अन्‍त्‍यानुप्रास अलंकार
 
उदाहरण (सवैया) :-
घर का सब भेद के अंत लगे सब जानत गाँव जवार के टोला।
जहाँ सोना सुनात रहे कई सेर हवे त उहाँ निकले कुछ तोला।
सब खेत बँटे त मिले बखरा इहवाँ एक कोली उहाँ एक कोला।
सब सम्‍पति आ सनमान के अन्‍त भी अंत में अन्‍त्‍यानुप्रास में होला॥
 
दोहा :- धन सम्‍पत्ति आ सुमति के जहाँ अंत लगि जात।
उहें अन्‍त्‍यानुप्रास तब घर में मानल जात॥
बटले का बा ओ घरे बटले जहाँ कहात।
अइसन के परिवार में ई अनुप्रास सुहात॥
 


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