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कविता

अखबार पढ़ते हुए
हरीशचंद्र पांडे


ट्रक के नीचे आ गया एक आदमी
वह अपने बाएँ चल रहा था
एक लटका पाया गया कमरे के पंखे पर होटल में
वह कहीं बाहर से आया था
एक नहीं रहा बिजली का नंगा तार छू जाने से
एक औरत नहीं रही अपने खेत में अपने को बचाते हुए
एक नहीं रहा डकैतों से अपना घर बचाते हुए

ये कल की तारीख में लोगों के मारे जाने के समाचार नहीं
कल की तारीख में मेरे बच कर निकल जाने के समाचार हैं

 


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हिंदी समय में हरीशचंद्र पांडे की रचनाएँ