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बाल साहित्य

मुझे शिकायत
शादाब आलम


मुझे शिकायत! मुझे शिकायत!

भैया को माफी मिल जाती
बड़ी-बड़ी शैतानी पर
गुस्सा हो जाते सब मेरी
छोटी-सी नादानी पर।
मैं डाँटी जाती, भैया की
मिलकर करते सभी हिमायत।

घर में आती आइसक्रीम या
रबड़ी, रसगुल्ले-चमचम
भैया पाता सबसे ज्यादा
मुझको मिले हमेशा कम।
लाड़-प्यार सब उसके हिस्से
मुझको तो बस मिले हिदायत।

हर इक कक्षा में अव्वल मैं
भैया होता केवल पास
फिर भी उस पर ही क्यूँ सबको
मुझसे ज्यादा है विश्वास?
सब चाहें मैं घर पर बैठूँ
भैया पढ़ने जाए विलायत।
मुझे शिकायत! मुझे शिकायत!

 


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