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कविता

अतिथि
आल्दा मेरीनी

अनुवाद - सरिता शर्मा


तुम एक रात नशे में आए
दुस्साहसिक इशारा करते हुए
उस आदमी की तरह जो औरत को फँसाना चाहता है,
अपने अँधेरे फंदे में
और मुझे तुम पर भरोसा नहीं था
तुम कुटिल अवसरवादी।
मेरी नेकनीयती पर
तुम अपनी मलिन श्रोणि को गिराने देते
तुम्हारे तमाम धोखे के बावजूद,
तुमने एक मृत अपराध किया था


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