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कविता

मेरी छाया को तुममें खो जाने दो
पेर लागरकविस्त

अनुवाद - सरिता शर्मा


मेरी छाया को तुममें खो जाने दो
मुझे खुद को खोने दो
ऊँचे पेड़ों के तले,
जो गोधूलि में अपनी पूर्णता खो देते हैं,
आकाश और रात के सामने आत्मसमर्पण कर लेते हैं।


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