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बाल साहित्य

दादा-दादी
शादाब आलम


माँ, पापा से कहो गाँव से
दादा-दादी को ले आएँ।

रिंकू अपने दादा-दादी
की बातें करते न थकता
सुनता रहता हूँ मैं उसकी
पर अपनी कुछ कह न सकता।
बातें उसकी मुझको अपने
दादा-दादी याद दिलाएँ।

रिंकू के दादा जी उसके
साथ खेलते धूम मचाते
कंधे पर बैठाकर अपने
बड़ी दूर तक उसे घुमाते।
दादी जी परियों के किस्से
रोज रात को उसे सुनाएँ।
रिंकू कहता, उसका घर तो
हँसी-खुशी का एक महल है
दादा-दादी के रहने से
हरदम रहती चहल-पहल है।
प्यार-दुआ की बारिश घर में
दादा-दादी खूब कराएँ।

माँ, पापा से कहो गाँव से
दादा-दादी को ले आएँ।


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