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बाल साहित्य

जीता रहे किसान
शादाब आलम


अन्न उगाए
हमें खिलाए
सचमुच बड़ा महान।
जीता रहे किसान।

हार न माने
सीना ताने
झेले यह तूफान।
जीता रहे किसान।

मिट्टी-गोबर
भूसी-चोकर
के गाता गुणगान।
जीता रहे किसान।

जीवन सादा
नेक इरादा
बड़ा भला इनसान।
जीता रहे किसान।

आओ मिलके
पूरे दिल से
इसको दें सम्मान।
जीता रहे किसान।


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हिंदी समय में शादाब आलम की रचनाएँ