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बाल साहित्य

खाओ भाई खूब मिठाई
जितेश कुमार


खाओ भाई खूब मिठाई
चाचू की हो गई सगाई।
खोया बरफी, काजू बरफी,
पीलीवाली सोन की बरफी।
लड्डू बूँदी, लड्डू बेसन के,
निकली गरम जलेबी छनके।
टूट पड़ो सब बहना-भाई,
भारत की यह राष्ट्र-मिठाई।
पेड़े-परवल, गुलाब-जामुन,
खाती खूब मोटी मुनमुन।
रसगुल्ला है रस में डूबा,
घेवर सबसे अलग अजूबा।
चंद्रकला और बालूशाही,
गुझिया, खीर, रसमलाई।
नरियल-लड्डू, मींग का पागा,
कलाकंद सोने पे सुहागा।
शक्कर पारे, पूरन पोली,
छककर खाई मेरी टोली।


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