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बाल साहित्य

मैं बेटी हूँ
जितेश कुमार


मम्मी कहती बिटिया रानी,
तू घर की है चुनरी धानी।
दुबकी गोद में लेटी हूँ,
पापा की मैं बेटी हूँ।
खूब चहकती घर के अंदर,
धमाचौकड़ी घर में दर-दर।
ए बी सी डी पढ़ती हूँ,
घर भर की मैं बेटी हूँ।
हाथ फेरते पापा जब,
खिल जाती हूँ दिल से तब।
सबका कहना सुनती हूँ,
घर का गहना बेटी हूँ।
सपना मैंने जो देखा है,
पूरा करना मेरा अरमा है।
धीरे-धीरे मंजिल चढ़ती हूँ,
सबकी सच्ची-अच्छी बेटी हूँ। 


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