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बाल साहित्य

ऋतुएँ
जितेश कुमार


देश में अपनी ऋतुएँ छह,
सबकी खुशबू अलग तरह।
बजाए कुदरत गाजा-बाजा,
समझो आया बसंत राजा।
तन पे पसीना, मुश्किल जीना,
आई गर्मी, शिकंजी पीना।
आया बादल, बरखा पानी,
धरती हरी है, वर्षा रानी।
निकला स्वेटर, सब थर-थर,
शरद् बसाया अपना घर।
ठंड है अपने चरम रूप में,
आया हेमंत, बैठा धूप में।
गुलाबी मौसम लगता फिर,
हँसती आई ऋतु शिशिर।
भारत की धरती है न्यारी,
फिर-फिर आतीं ऋतुएँ सारी।


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