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बाल साहित्य

चिड़ियाघर में
जितेश कुमार


चलो चलें हम चिड़ियाघर में,
जो है दूर बड़े शहर में।
कितना सजा हुआ है सुंदर,
आओ देखें घूम-घूमकर।
कितने पशु यहाँ विचरते,
हँसते-गाते, उछला करते।
सिंह, तेंदुआ, बाघ, लोमड़ी,
आँख दिखाते बड़ी-बड़ी।
उछल-कूद करता है बंदर,
गोरिल्ला पिंजड़े के अंदर।
मजेदार पानी का घोड़ा,
सरका कछुआ थोड़ा-थोड़ा।
उजली-काली जेबरा धारी,
देखो गैंडा कितना भारी।
लंबू दादा, खड़ा जिराफ,
बंद पिटारे में है साँप।
हिरनों की है आई टोली,
भालू-हाथी ऊँची-बोली।
खच्चर आया बीच भँवर में,
मजा आ गया चिड़ियाघर में।


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