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बाल साहित्य

अगर पंख होते
जितेश कुमार


पंख हमारे गर दो होते,
पल में बनते मैना-तोते।
चल उड़ जाते आसमान में,
चिड़ियोंवाली उस जहान में।
चीं-चीं करते, शोर मचाते,
इधर-उधर पल में उड़ जाते।
पेड़ों की फुनगी को छूते,
उड़-उड़ करते सौ करतूतें।
सब चिड़ियों से हाथ मिलाते,
उड़ते-उड़ते स्कूल जाते।
खुश होते, सपनों में खोते,
पंख हमारे गर दो होते।


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