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बाल साहित्य

सौ हाथी नाचें
श्रीप्रसाद


सौ हाथी यदि नाच दिखाएँ
यह हो कितना अच्छा,
नाच देखने को आएगा
तब तो बच्चा-बच्चा

धम्मक-धम्मक पाँव उठेंगे
सूँडें झम्मक-झम्मक
उछल-उछल हाथी नाचेंगे
छम्मक-छम्मक-छम्मक।

जो देखेगा हँसते-हँसते
पेट फूल जाएगा,
देख-देख करके सौ हाथी
बड़ा मजा आएगा।

ऐसा नाच कहीं भी जो हो
उसे देखने जाऊँ,
ढम्म-ढमाढम ढोल बजाऊँ
और गीत भी गाऊँ।

जब भी सौ हाथी आएँगे
होगा नाच तभी ये,
मगर देख पाऊँगा क्या मैं
सुंदर नाच कभी ये?

 


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