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बाल साहित्य

संडे गया खराब
शादाब आलम


आज सुबह से मन्नू जी को
आने लग गए तेज जुलाब
पड़ गए बिस्तर पर बेचारे
संडे पूरा गया खराब।

आएँ खूब डकारें उनको
पेट बोलता घुड़-घुड़-घुड़
अम्मा कहती मेथी फाँको
दादी कहतीं खा ले गुड़।

रानी, छंगू, पप्पू, चुन्नू,
गए घूमने हैं मेला
मन्नू जी से पेट दर्द ही
नहीं जा रहा है झेला।

आज बने हैं दही-बड़े भी
और पराठे लच्छेदार
लेकिन उनके लिए मूँग की
पतली खिचड़ी है तैयार।

कल रात को खाना खाकर
मन्नूजी जी गए फौरन लेट
थोड़ा टहल लिया होता तो
हल्का-फुल्का रहता पेट।


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