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कविता

मुझे तुम पर भरोसा नहीं
बॉब डिलन

अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय


वह ऐसे पेश आ रही है मानो हम कभी मिले ही नहीं

मैं समझ नहीं सकता
वह छोड़ देती है मेरा हाथ
छोड़ दिया है उसने मुझे दीवार की तरफ मुँह करके
मुझे यकीन है कि मुझे पता है
कि वह क्यों चली गई
लेकिन मैं उसके करीब बिल्कुल नहीं पहुँच सकता
हालाँकि हमने चुंबन किया जंगल की चमकती रात में
उसने कहा वह कभी नहीं भूलेगी
लेकिन अब सुबह स्पष्ट है
मानो कि मैं यहाँ हूँ ही नहीं
वह ऐसे पेश आ रही है मानो हम कभी मिले ही नहीं

यह सब मेरे लिए है नया
किसी रहस्य की तरह
एक गप्प की तरह भी हो सकता यह
फिर भी यह सोचना मुश्किल है
कि वह वही है
जिसके साथ था मैं कल रात
अंधकार के कारण हो गए हैं सपने वीरान
क्या मैं अभी भी स्वप्न देख रहा हूँ
मैं चाहता हूँ कि वह प्रकट हो
एक बार वह अपनी आवाज में बात करे
ऐसे पेश आने के बजाय मानो हम कभी मिले ही नहीं

यदि उसे अच्छा नहीं लग रहा
तो वह यह बताती क्यों नहीं
मेरी ओर से अपना मुँह फेरने के बजाय ?
निस्संदेह
वह बहुत दूर चली गई लगती है
कि मैं उसका पीछा करूँ
हालाँकि रात चक्कर लगाती रही घूमती रही
मुझे अभी भी उसका फुसफुसाना याद है
लेकिन जाहिर वह याद नहीं करती
और जाहिर तौर पर वह याद करेगी भी नहीं
वह सिर्फ ऐसे पेश आ रही है मानो हम कभी मिले ही नहीं

यदि मुझे अनुमान नहीं लगाना पड़ता
मैं खुशी से कबूल कर लेता
हर वह चीज जिसके लिए मैंने कोशिश की
यदि मैं उसके साथ बहुत देर रहा होता
या मैंने कुछ गलत किया होता
मैं चाहता हूँ वह मुझे बताए क्या बात है
मैं चला जाऊँगा और छिप जाऊँगा
हालाँकि उसकी स्कर्ट ऐसे डोल रही है मानो गिटार बजाया गया हो
उसका मुँह आँसुओं से भीग रहा था
लेकिन अब कुछ बदल गया है
क्योंकि अब वह वह नहीं रही
वह सिर्फ ऐसे पेश आ रही है मानो हम कभी मिले ही नहीं

आज मैं जा रहा हूँ
अपने पथ पर जाऊँगा मैं
इसके बारे में बहुत अधिक नहीं बता सकता मैं
लेकिन यदि तुम चाहती हो
तो बस तुम्हारी तरह हो सकता हूँ मैं
और बहाना कर सकता हूँ कि हमने कभी छुआ ही नहीं
और यदि कोई मुझसे पूछता है
"क्या भूलना आसान है?"
मैं कहूँगा "यह आसानी से किया जाता है
तुम बस किसी को मन में बिठा लो
और बहाना बनाओ मानो तुम कभी मिले ही नहीं"

 


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