डाउनलोड मुद्रण

अ+   अ-

कविता

हम बेचारे
असलम हसन


ऊपर अंबर
चाँद सितारे
नीचे धरती
हम बेचारे
धूप-छाँव और
दुशवारी लेकिन
जीना जारी
जान से प्यारा
अपना जीवन
फिर भी
जिंदगी भारी
उनके हिस्से
हवा-हवाई
लाल से चेहरे
साफ-सफाई
धूल भरे हैं
गाँव ये सारे
कीचड़ सने
पाँव हमारे
हम तो बस
मेहनत के
सहारे
शह के बल
पर वो जीते
घात-मात से
हम हारे
नील गगन
चाँद सितारे
सख्त जमीं
और हम बेचारे...


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में असलम हसन की रचनाएँ