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बाल साहित्य

सूरज चाचू
मनोज कुमार गुप्ता


सूरज चाचू क्यों रूठे हो
हमको जरा बताओ तो।
कई दिनों से छुपे हुए हो
घर से बाहर आओ तो।

ठंड के मारे थर-थर काँपूँ
गर्मी तनिक बढ़ाओ तो।
सूरज चाचू क्यों रूठे हो
हमको जरा बताओ तो।
 


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