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कविता

यह यकीन करना कितना मुश्किल है
वाल्झीना मोल्त

अनुवाद - कुणाल सिंह


यह यकीन करना कितना मुश्किल है
कि आज हम जितने हैं
कभी इससे भी कमसिन हुआ करते थे
कि हमारी खाल इतनी पारदर्शी हुआ करती थी
कि नसों शिराओं की नीली स्याही झाँकती थी उससे होकर
जैसे स्कूल कि कॉपिओं के जर्द पन्ने पे खिंची हों नीली लाइनें

कि यह दुनिया एक यतीम कुत्ते की मानिंद थी
जो छुट्टी के बाद हमारे साथ खेला करता था
और हम सोचते थे कि एक दिन इसे हम अपने घरों में लिए जाएँगे
हम ले जाते, इससे पेश्तर कोई और बाजी मार ले गया
उसे एक नाम दिया
प्रशिक्षित किया कि अजनबियों को देखो तो भौंको
और अब हम भी अजनबियों के घेरे में आते थे

और इसी वजह से देर रात हम जाग पड़ते
और अपनी टीवी सेट की मोमबत्तियों को जला देते
और उनकी गर्म रौशनी की आँच में हमने पहचानना सीखा
चेहरों और शहरों को
और सुबहिया हिम्मत से लैश होकर
फ्राइंग पैन से उतार फेंकना सीखा ओम्लेट को

लेकिन हमारा कुत्ता किसी और के फीते से बँधा बड़ा होता रहा
और हमारी माँओं ने अचानक हमें मर्दों के साथ सोने
और आज की तारीख में देखने से मना कर दिया

किसी बेदाग कल्पना में खोने की सोचना कितना आसान होता है।

(बेलारूस की चर्चित कवि, यह अनुवाद अंग्रेजी से)
 


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