आइए पढ़ते हैं : रतननाथ सरशार का उपन्यास :: आजाद-कथा
गांधी साहित्य (11 मई 2018), मुखपृष्ठ संपादकीय परिवार

दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास
मोहनदास करमचंद गांधी

प्रथम खंड : 1. भूगोल

अफ्रीका संसार के बड़े से बड़े महाद्वीपों में से एक है। हिंदुस्तान भी एक महाद्वीप के जैसे देश माना जाता है। परंतु अफ्रीका के भू-भाग में से केवल क्षेत्रफल की दृष्टि से चार या पाँच हिंदुस्तान बन सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका के ठेठ दक्षिण विभाग में स्थित है। हिंदुस्तान के समान अफ्रीका भी एक प्रायद्वीप ही है। इसलिए दक्षिण अफ्रीका का बड़ा भाग समुद्र से घिरा हुआ है। अफ्रीका के बारे में सामान्यतः यह माना जाता है कि वहाँ ज्यादा से ज्यादा गर्मी पड़ती है और एक दृष्टि से यह बात सच है। भू-मध्य रेखा अफ्रीका के मध्य से होकर जाती है और इन रेखाओं के आसपास में पड़ने वाली गर्मी की कल्पना हिंदुस्तान के लोगों को नहीं आ सकती। ठेठ हिंदुस्तान के दक्षिण में जिस गर्मी का अनुभव हम लोग करते हैं, उससे हमें भू-मध्य रेखा के आसपास के प्रदेशों की गर्मी की थोड़ी कल्पना हो सकती है। परंतु दक्षिण अफ्रीका में ऐसा कुछ नहीं है, क्योंकि वह भू-भाग भूमध्य रेखा से बहुत दूर है। उसके बहुत बड़े भाग की आबहवा इतनी सुंदर और ऐसी समशीतोष्ण है कि वहाँ यूरोप की जातियाँ आराम से रह-बस सकती हैं, जबकि हिंदुस्तान में बसना उनके लिए लगभग असंभव है। फिर, दक्षिण अफ्रीका में तिब्बत अथवा कश्मीर जैसे बड़े-ऊँचे प्रदेश तो हैं, परंतु वे तिब्बत अथवा कश्मीर की तरह दस से चौदह हजार फुट ऊँचे नहीं हैं। इसलिए वहाँ की आबहवा सूखी और सहन हो सके इतनी ठंडी रहती है। यही कारण है कि दक्षिण अफ्रीका के कुछ भाग क्षय से पीड़ित रोगियों के लिए अति उत्तम माने जाते हैं। ऐसे भागों में से एक भाग दक्षिण अफ्रीका की सुवर्णपुरी जोहानिसबर्ग है। वह आज से 50 वर्ष पहले बिलकुल वीरान और सूखे घासवाला प्रदेश था। परंतु जब वहाँ सोने के खदानों की खोज हुई तब मानों जादू के प्रताप से टपाटप घर बाँधे जाने लागे और आज तो वहाँ असंख्य विशाल सुशोभित प्रसाद खड़े हो गए हैं। वहाँ के धनी लोगों ने स्वयं पैसा खर्च करके दक्षिण अफ्रीका के उपजाऊ भागों से और यूरोप से भी, एक-एक पेड़ के पंद्रह-पंद्रह रुपये देकर, पेड़ मँगाए हैं और वहाँ लगाए हैं। पिछला इतिहास न जानने वाले यात्री को आज वहाँ जाने पर ऐसा ही लगेगा कि ये पेड़ उस शहर में जमानों से चले आ रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीका के सारे विभागों का वर्णन मैं यहाँ नहीं देना चाहता। जिन विभागों का हमारे विषय के साथ संबंध है, उन्हीं का थोड़ा वर्णन मैं यहाँ देता हूँ। दक्षिण अफ्रीका में दो हुकूमतें हैं। (1) ब्रिटिश (2) पुर्तगाली। पुर्तगाली भाग डेलागोआ बे कहा जाता है। हिंदुस्तान से जाने वाले जहाजों के लिए वह दक्षिण अफ्रीका का पहला बंदरगाह कहा जाएगा। वहाँ से दक्षिण की ओर आगे बढ़ें तो पहला ब्रिटिश उपनिवेश नेटाल आता है।

पूरी सामग्री पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

अंग्रेजों का औपनिवेशिक अभियान
मृत्युंजय

फोर्ट विलियम कॉलेज, विलियम जोन्स द्वारा स्थापित 'एशियाटिक सोसाइटी' [15 जनवरी, 1874] के बाद शिक्षा के क्षेत्र अंग्रेजों द्वारा स्थापित किया गया दूसरा महत्वपूर्ण संस्थान है। इस संस्थान ने, ऐसा कहा जाता है, पहली बार व्यवस्थित आधुनिक शिक्षा का प्रारंभ हिंदुस्तान में किया। मार्क्विस वेलेजली द्वारा स्थापित और योजनानिबद्ध किया गया यह कॉलेज लगभग पचास वर्षों [1800-1854] तक शिक्षा के क्षेत्र में काम करता रहा। कॉलेज का अध्ययन करते हुए हम न केवल आधुनिक भारतीय शिक्षा के प्रति अंग्रेजों का दृष्टिकोण देख सकते हैं, वरन आधुनिक गद्य की उत्पत्ति और उस समय की भाषा-संबंधी नीति की भी समीक्षा कर सकते हैं जो आगे चलकर कैनन निर्माण में भूमिका निभाती रही।

आलोचना
पंकज पराशर
अक्सर नजर आ जाता है दिल आँखों में
(असगर वजाहत की कहानियों पर केंद्रित)

कहानियाँ
गोविंद सेन
गड़वाट
गळ्या का सपना
गुमशुदा चाँद की वापसी
मसाण
सुखदेव की सुबह
स्पीड ब्रेकर

विशेष
शंभुनाथ मिश्र
उपन्यास की भारतीयता और हिंदी आलोचना

विमर्श
प्रदीप त्रिपाठी
तुलनात्मक शोध के विविध परिप्रेक्ष्य

व्यंग्य
मयंक शर्मा
रबड़ के उसूल

देशांतर - कविताएँ
निकोला डेविस
जिस दिन युद्ध आया
लिजवी कॅलसन
किसने बनाया ये कानून ?

कविताएँ
भारती गोरे
डॉ. भारत खुशालानी
मंजूषा मन

संरक्षक
प्रो. गिरीश्‍वर मिश्र
(कुलपति)

 संपादक
प्रो. आनंद वर्धन शर्मा
फोन - 07152 - 252148
ई-मेल : pvctomgahv@gmail.com

समन्वयक
अमित कुमार विश्वास
फोन - 09970244359
ई-मेल : amitbishwas2004@gmail.com

संपादकीय सहयोगी
मनोज कुमार पांडेय
फोन - 08275409685
ई-मेल : chanduksaath@gmail.com

तकनीकी सहायक
रविंद्र वानखडे
फोन - 09422905727
ई-मेल : rswankhade2006@gmail.com

कार्यालय सहयोगी
उमेश कुमार सिंह
फोन - 09527062898
ई-मेल : umeshvillage@gmail.com

विशेष तकनीकी सहयोग
अंजनी कुमार राय
फोन - 09420681919
ई-मेल : anjani.ray@gmail.com

गिरीश चंद्र पांडेय
फोन - 09422905758
ई-मेल : gcpandey@gmail.com

आवश्यक सूचना

हिंदीसमयडॉटकॉम पूरी तरह से अव्यावसायिक अकादमिक उपक्रम है। हमारा एकमात्र उद्देश्य दुनिया भर में फैले व्यापक हिंदी पाठक समुदाय तक हिंदी की श्रेष्ठ रचनाओं की पहुँच आसानी से संभव बनाना है। इसमें शामिल रचनाओं के संदर्भ में रचनाकार या/और प्रकाशक से अनुमति अवश्य ली जाती है। हम आभारी हैं कि हमें रचनाकारों का भरपूर सहयोग मिला है। वे अपनी रचनाओं को ‘हिंदी समय’ पर उपलब्ध कराने के संदर्भ में सहर्ष अपनी अनुमति हमें देते रहे हैं। किसी कारणवश रचनाकार के मना करने की स्थिति में हम उसकी रचनाओं को ‘हिंदी समय’ के पटल से हटा देते हैं।
ISSN 2394-6687

हमें लिखें

अपनी सम्मति और सुझाव देने तथा नई सामग्री की नियमित सूचना पाने के लिए कृपया इस पते पर मेल करें :
mgahv@hindisamay.in