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कविता

जतरा
अरुणेश नीरन


महकवा माँगे फुलवा के पँखुरी
फुलवा माँगे पतइया के पाँख
पतई माँगे हरियर डढ़िया
डढ़िया माँगे धरतिया अधार

धरतिया माँगे अँखुआ के अँखिया
अँखिया माँगे बदरवा के धार
धरवा माँगे करिया कजरवा
कजरवा माँगे अगिया के भार

जड़ में बसेला मह-मह महकवा
फुलवा, पतइया, मोजर रसधार
अँखुआ जे फोरेला धरती के छतिया
तब होला फेड़वा के सेनुरा सिंगार

 


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हिंदी समय में अरुणेश नीरन की रचनाएँ