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कविता

खेसाड़ी दाल की तरह निंदित
ज्ञानेंद्रपति


खेसाड़ी दाल की तरह निंदित
उखाड़कर फेंक दिया जाऊँगा
भारतीय कविता के क्षेत्र से

उस जगह लाल गालवाले टमाटर बोए जाएँगे
टमाटर ही टमाटर
जैव प्रयोगशालाओं में परिवर्तित अंतःरचनावाले
स्वस्थ-सुंदर-दीर्घायु
गुदाज होगी उनकी देह
अनिंद्य होगा उनका रस
बोतलों में सरलता से बंद होकर
शुष्कहृदयों को रसिक बनाएँगे
रसिकों को ललचाएँगे
और रसज्ञों को भाएँगे
वे टमाटर
इनके खेत और उनके घर भरेंगे
उनके गुण गाते न थकेंगे गुणीजन
उनकी अनुशंसा होगी, प्रशंसा होगी
वे युगानुकूल माने जाएँगे निर्विवाद

मानव-संसाधन-मंत्रालय के अंतर्गत
संस्कृति विभाग में
गुपचुप खुला है एक प्रकोष्ठ
कृषि-मंत्रालय के खाद्य प्रसंस्करण प्रभाग के साझे में
क्योंकि अब लक्ष्य है निर्यात और अभीष्ट है विदेशी पूँजी-निवेश
और यह है निश्चित
कि देसी और दुब्बर खेसाड़ी दाल की तरह निंदित
उखाड़कर फेंक दिया जाऊँगा
भारतीय कविता के क्षेत्र से
क्योंकि अब
इतिहास की गति के भरोसे न बैठ
इतिहास की मति बदलने की तकनीक है उनकी मुट्ठी में

खो जाऊँगा
जिस तरह खो गई है
बटलोई में दाल चुरने की सुगंध
अधिकतर घरों में
और अखबारों को खबर नहीं
अखबारों के पृष्ठ पर
विज्ञापनों से बची जगह में
वर्ल्ड बैंक के आधिकारिक प्रवक्ता का बयान होगा
खुशी और धमकी के ताने-बानेवाला बयान
जिसका मसौदा
किसी अर्थशास्त्री ने नहीं
किसी भाषाशास्त्री ने नहीं
बल्कि सामरिक जासूसों की स्पेशल टीम ने
टास्क फोर्स ने
तैयार किया होगा
ढँकने-तोपने - कैमाउफ्लेज - में माहिर
पेंटागन और सी.आई.ए. के चुनिंदा युद्धकला-विशारद अफसरों के
एक संयुक्त गुप्त दल ने

 


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