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कविता

मेरा नाम संगीतमय है
ईमान मर्सल


शायद जिस खिड़की के किनारे मैं बैठी थी
उसने पहले से ही कीर्तिकथा कह दी थी
मैंने अपनी नोटबुक पर लिखा :
ईमान...
स्कूल का नाम : ईमान मर्सल प्राथमिक विद्यालय
न तो टीचर की छड़ी और
न ही पिछली बेंचों से आने वाली हँसी ही रोक पाई मुझे
ऐसा करते रहने से

मैंने सोचा, अपनी गली का नाम मैं अपने नाम पर रख देती
अगर उस पर बने मकान थोड़ा चौड़े होते
और उनमें कुछ गुप्त कमरे बने होते
जहाँ मेरी सहेलियाँ अपने बिस्तर में लेट बिंदास सिगरेट फूँकतीं
और उनके बड़े भाई उन्हें कभी पकड़ भी न पाते

उनके दरवाजे अगर नारंगी रंग से रँगे होते
आनंद के रंग की तरह
उनमें छोटे-छोटे छेद बने होते
ताकि कोर्ई भी अंदर रहने वाले बड़े परिवारों की ताक-झाँक कर सकता
शायद तब हमारी गली में किसी को भी अकेलापन न महसूस होता

बड़े काम सिर्फ
बड़े दिमाग के लोग सोचते हैं
मेरे नाम पर बनी गली के किनारे सफेद पटरियों पर चलते रहगुजर
इन शब्दों में जिक्र करते मेरा
लेकिन सिर्फ छोटा-सा एक पुराना बैर था मेरा उस गली से -
उसके पत्थरों ने मेरे घुटनों पर गहरा निशान छोड़ा है -
बस इसी कारण मैंने तय किया कि गली इस लायक नहीं

मुझे ठीक-ठीक याद नहीं
कब मुझे यह पता चला कि
मेरा नाम इतना संगीतमय है कि एकदम उपयुक्त है
ऑटोग्राफ देने के लिए छंदबद्ध कविताओं के लिए
और उड़ने के लिए भी
उन दोस्तों के चेहरों के आगे जिनके नाम बहुत साधारण थे

जिन्हें यह नहीं पता कि एक संदिग्ध नाम होने के क्या फायदे हैं
जो आपके चारों ओर संदेह का घेरा बना देता है
और जिसके कारण आपके भीतर कोई और बन जाने की इच्छा भर जाती है
ताकि जो कोई नया साथी मिले, वह पूछे :
क्या तुम ईसाई हो
या
कहीं तुम लेबनान से तो नहीं आई?

दुर्भाग्य से, इस बीच कुछ हो गया।
अब जब कोई मेरा नाम पुकारता है
मैं चकरा जाती हूँ और चारों ओर देखने लगती हूँ
एक स्त्री जिसका शरीर अब मेरे जैसा हो गया
और छाती ऐसी कि हर दिन हर साँस कर्कश-सी जान पड़े
उसका ऐसा नाम भी संभव है?

बेडरूम से बाथरूम जाते समय
अक्सर मैं खुद को देखती हूँ
सोचती हूँ मेरा पेट व्हेल जितना बड़ा क्यों नहीं
ताकि जिन चीजों को मैं पचा नहीं पाती
उनसे अपना पिंड छुड़ा लूँ

 


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