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जीवनी

सुब्रह्मण्यम भारती : व्यक्तित्व और कृतित्व
मंगला रामचंद्रन

अनुक्रम 14. देशभक्त क्रांतिकारी वांछीनाथन द्वारा कलेक्टर एश की हत्या पीछे     आगे

अच्छे दिन आ रहे हैं , अच्छे दिन आ रहे हैं। विभिन्न धर्म और जाति के लोग आपस में हिल-मिल रहे हैं। आपसी कलह और झगड़े खत्म हो रहे हैं। जब शिक्षित व्यक्ति पाप करता है , गलत करता है तो वो नीचे-नीचे पतन की ओर जाएगा ही।

सन 1911 में कलेक्टर एश को देशभक्त वांछीनाथन ने मार दिया। चेन्नै पुलिस को शंका थी कि इस हत्या में पुदुचैरी में रहने वाले भारती, अरविंद व उनके साथियों का इसमें हाथ है। भले ही इस घटना में इनमें से किसी का भी हाथ न हो पर पुलिस और सी.आई.डी. ने पुदुचैरी में एक तरह से डेरा ही डाल दिया। छोटी-छोटी टोलियों में इन सभी के घरों के आस पास बैठे दिख जाते थे। कई बार भेष बदलकर कभी भारती के प्रशंसक बन कर, कभी रत्न बेचने वाले तो कभी पढ़े-लिखे अँग्रेजी जानने वाले विद्वान की तरह आकर उनसे देश के हालात पर भारती के विचार जानने आते। जो भी आता उनकी बुद्धि का कायल हो जाता कि वो ताड़ जाते थे कि सामने वाले की असलियत क्या है। साथ ही ऐसे अधिकतर लोग उनकी देशभक्ति और कविताओं से प्रभावित होकर उनके प्रति आदर से भर कर लौटते।

भारती पुदुचैरी में जिस मकान में रहते थे उसे छोड़ना पड़ा। पत्नी और दोनों बच्चियाँ आ गई थी सो उस मकान के सामने एक दो मंजिला मकान था उसमें रहने लगे। जिस दिन उन्होंने मकान बदला उसी रात को भयंकर समुद्री तूफान आया। सैकड़ों पेड़, मकान आदि गिर गए और बहुत नुकसान हुआ। जहाँ पहले रह रहे थे उस मकान की दीवार भी गिर गई थी। भारती और चेल्लमा ने इस बारे में आपस में बातें करते हुए सोचा कि अगर वो लोग आज घर बदलते नहीं तो...? इस घटना और पत्नी से इस पर चर्चा के साथ भारती के मन में इससे संबंधित एक कविता का उदय हुआ।

विलियम टी.ए. एश की हत्या की साजिश कुछ पहले से ही चल रही थी। जो देशभक्त उग्रवादी दल के थे वे एश की कई गतिविधियों और भारतीयों के प्रति अपमान व निर्दयता के व्यवहार से क्रोधित थे। ऐसे एक स्वतंत्रता सेनानी एम पी टी आचार्य ने पेरिस से म. श्रीनिवासचार्य को एक पत्र लिखा। लंदन में जार्ज पंचम का राजतिलक होने वाला था, उसी समय कुछ महत्वपूर्ण काम निपटाने हैं। अगर वो कार्य पुदुचैरी में संभव न हों तो किसी सुरक्षित दूर के स्थान पर करवा दें।

सन 1908 में नीलकंठ ब्रह्मचारी नामक युवक शहर-गाँव घूम-घूम कर युवाओं को 1857 की तरह एक गदर की तैयारी में लगे थे। सन 1910 जून में उसकी मुलाकात वांछीनाथन से हुई जिसके जोश और वीरता से वो प्रभावित हुए। वांछीनाथन जंगल के किसी विभाग का कर्मचारी था और उसकी पत्नी और एक बेटी भी थी। इस युवा को नीलकंठ ने अपने दल में भर्ती किया। इस बीच जेल में बंद देशभक्तों से मिलने आने वालों से 'एश' की लगातार शिकायत आ रही थी। एश इन लोगों को तंग करने के नए-नए तरीके निकालता था। सन 1910 के आखिरी में वांछीनाथन पुदुचैरी में नीलकंठ से मिलने गया। नीलकंठ ब्रम्हचारी पुदुचैरी से बाहर गए हुए थे। वांछीनाथन एक सप्ताह वहीं रुक गया। तभी उसका परिचय क्रांतिवीर व.वे.सू अय्यर से हुआ। अय्यर पुदुचैरी में रहते हुए विद्रोह के कार्य में लगे ही हुए थे। वांछीनाथन से मिल कर उन्हें लगा कि एश को मारने के लिए वही उपयुक्त व्यक्ति होगा।

वांछीनाथन घर जाकर फिर लौट कर अपने मिशन को पूर्ण करने आ गया। उसे उम्दा पिस्तौल आदि उपलब्ध करा कर एश को खत्म करने का आदेश देकर भेजा गया। वांछीनाथन मि. एश पर नजर रखने लगा कि उनकी गतिविधियाँ क्या और कैसी रहती हैं। 17 जून 1911 को वो दक्षिण भारत की गर्मी से निजात पाने के लिए पत्नी सहित पर्वतीय स्थल कोडैकनाल जा रहे थे। ट्रेन एक जंक्शन पर रुकी और उनका पीछा कर रहा वांछीनाथन उनके डिब्बे (कंपार्टमेंट) में चढ़ गया। उसने एश पर गोली चला दी, उनके मरने की पुष्टि कर के प्लेटफॉर्म पर दौड़ लगा दी। उस समय दिन के ग्यारह बज रहे थे। उसका पीछा पुलिस की पलटन ने किया। प्लेटफॉर्म के अंत में बने शौचालय में घुस कर अंदर से चिटकनी लगा ली। पुलिस दरवाजा खुलवाने की कोशिश कर रही थी तभी अंदर से गोली चलने की आवाज आई। पुलिस ने दरवाजा तोड़ कर अंदर देखा कि वांछी के मुँह में पिस्तौल की नली है और वो वीरगति को प्राप्त हो चुका था।


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