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कहानी

कथा संस्कृति
खंड : तीन
विदेशी पौराणिक कथाएँ


संपादन - कमलेश्वर

अनुक्रम लौटते सूरज का इन्तजार - होमर पीछे    

होमर की रचनाएँ ‘इलियड’ और ‘ओडेसी’ सम्भवतः 1000 ई. पू. की हैं। प्रस्तुत कहानी ‘ओडेसी’ के पन्द्रहवें भाग का एक अंश है।

यह भी एक अजीब रोमांचक कहानी है। एक राजकुमार था। उसका पिता एक द्वीप का राजा था। कहावत है कि सूरज वहाँ से वापस लौटता है। वहाँ के व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ते। जब वे वृद्ध हो जाते हैं, तो मृत्यु का देवता आकर उन्हें आसानी से मार देता है। एक सुन्दर औरत उस राजकुमार की देख-भाल करती थी। एक दिन वह औरत एक खाली जहाज के पास कपड़े धो रही थी कि एक जहाजी ने उसे अपने वश में कर लिया। उस जहाजी ने उस औरत से पूछा कि वह कहाँ काम करती है और कहाँ से आयी है? औरत ने मेरे पिता के महल की ओर इशारा करके कहा कि वह सीदान के एक धनी की लड़की है। उसके पिता का नाम अरीबास है। एक दिन वह अपने खेतों से वापस आ रही थी कि एक समुद्री लुटेरे ने उसे पकड़ लिया और यहाँ लाकर अच्छे दामों में उसे बेच दिया। उसके प्रेमी ने उससे कहा कि उसके माता-पिता अब भी जीवित हैं। वह उसे उनके पास पहुँचा सकता है। औरत बोली, ‘‘जब तुम्हारा जहाज भर जाए, तो चुपचाप मेरे पास सन्देश भेज देना। सन्देश मिलते ही काफी सोना-चाँदी लेकर तुम्हारे पास आ जाऊँगी। अपने साथ राजा के लड़के को भी लेती आऊँगी ताकि तुम उसे किसी दूसरी जगह बेचकर पैसा कमा सको।’’ जहाजी ने उसकी बातें मान लीं। जहाज एक वर्ष तक उस द्वीप पर रहा। जहाजियों ने काफी धन कमाया और माल से अपना जहाज भरकर जाने के लिए तैयार हो गये। तब उन्होंने उस स्त्री के पास खबर भेजी। वह स्त्री मुझे साथ लेकर और बहुत-सा सोना-चाँदी लेकर महल से बाहर आयी और जहाज में चली गयी। जहाज छह दिन तक बराबर चलता रहा। सातवें दिन जहाजियों ने उसे समुद्र में फेंक दिया। समुद्री मछलियाँ उसे खा गयीं। मुझे उसकी मृत्यु का बहुत दुख हुआ। वे लोग मुझे यहाँ ले आये, तब से मैं यहीं हूँ। शायद कभी उस द्वीप के दर्शन कर सकूँ, जहाँ से सूरज लौटता है।


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