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कविता

रोहित वेमुला को याद करते हुए
सोनी पांडेय


उसने कहा
मैं सोना चाहता हूँ
बंद करो सारे दरवाजे
खिड़की, रोशनदान तक ढक दो
परदे से
इतना अँधेरा करो की मेरी परछाईं तक न दिखे
मैं सोना चाहता हूँ
इस कदर सन्नाटे में कि तुम्हारी साँसों की
आवाजाही तक सुनाई न दे
मैं सोना चाहता हूँ
इस गहन विसाद के क्षण में
जब  हर आवाज कंठ में घुटी है
माएँ दहली हैं
भेज कर बेटों को पढ़ने
ऊँची पढ़ाई
मैं सोना चाहता हूँ
इस कदर धूल, गर्द और गुबार की दुनिया में
कि उम्मीदों के सारे दीए बुझ रहे हैं
माँ! अँधेरा करो...
 


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