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मोहम्मद इब्राहिम ज़ौक़
1789 – 1854



जन्म स्थान - दिल्ली,
 

 
रचनाएँ

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जायेंगे
तेरे कूचे को वो बीमारे-ग़म दारुश्शफ़ा समझे
आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दआ कहने को है
तेरा बीमार न सँभला जो सँभाला लेकर
जान के जी में सदा जीने का ही अरमाँ रहा
क्या ग़रज़ लाख ख़ुदाई में हों दौलत वाले
उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया
लायी हयात, आये, क़ज़ा ले चली, चले

 

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