मुखपृष्ठ | उपन्यास | कहानी | कविता | व्यंग्य | नाटक | आलोचना | चिंतन | विविध | समग्र-संचयन | अनुवाद | ई-पुस्तकें | संग्रहालय | संपर्क | लेखक दीर्घा | खोज
नई सामग्री विश्वविद्यालय की पत्रिकाएँ

'आधे-अधूरे' का एक दृश्य
'आधे-अधूरे' का एक दृश्य

मोहन राकेश का नाटक 'आधे-अधूरे'

'आधे-अधूरे' का एक दृश्य

मोहन राकेश का नाटक
आधे-अधूरे
 शिवमूर्ति की कहानी
ख्वाजा, ओ मेरे पीर!





'आधे-अधूरे' का एक दृश्य

कुणाल सिंह का उपन्यास
आदिग्राम उपाख्यान

'आदिग्राम उपाख्यान' लिखते हुए एक सवाल से बार-बार दो-चार हुआ कि वियतनाम पर अमेरिकी हमले के खिलाफ जब जुलूस निकाला गया था तब पोस्टरों पर जो कुछ भी लिखा गया था - आमार नाम तोमार नाम... इत्यादि; तो 'वियतनाम' की तुक में 'आदिग्राम' तो सटीक बैठता है, लेकिन वह जो न रोटी बेलता है न खाता है, बस रोटी से खेलता है, वह तीसरा आदमी कौन है?

 

kunwar-narayan

कुँवर नारायण पर
के. बिक्रम सिंह की वीडियो कृति

         अभी बाकी हैं कुछ पल



बहुवचन

हमारे अतीत का भविष्य : भूमंडलीकरण और संस्कृति उद्योग की आलोचना की ओर
  • के. सच्चिदानंदन
वाक् -व्यापार
  • वी.के. हरिहरन उण्णित्तान
लीलाधर जगूड़ी, श्रीप्रकाश शुक्ल और
भरत प्रसाद की कविताएँ

पुस्तक-वार्ता

एक दरके हृदय के पास
  • परमानंद श्रीवास्तव
आधुनिक रंग प्रस्थान के संधान में
  • रणजीत साहा
प्रार्थना के शिल्प में नहीं
  • पल्लव

HINDI

Sociology of Languages : A Perspective from Hindi
  • Subhash Sharma
Self-Narrative : Shamsher Bahadur Singh
  • Ranjana Argare
Eight Poems
  • Vishnu Nagar
हिंदी समय में खोजें



लेखक दीर्घा में खोजें

हमें लिखें
नाम
ईमेल आइडी
विषय
संदेश

नई प्रविष्टियों की नियमित सूचना पाने के लिए कृपया अपना ईमेल आइडी यहाँ दर्ज करें

मुखपृष्ठ | उपन्यास | कहानी | कविता | व्यंग्य | नाटक | आलोचना | चिंतन | विविध | समग्र-संचयन | अनुवाद | ई-पुस्तकें | संग्रहालय | संपर्क | लेखक दीर्घा | खोज