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कविता

मास्टर शेफ
स्नेहमयी चौधरी


मास्टर शेफ होटलों में
बढ़िया-से-बढ़िया खाने का तरीका बताता है
मैं भी एक नौकर ही हूँ ।
हर समय याद रखना -
अब सब्जी मँगाना, अब फल मँगाना, अब दूध...
क्या खाना बनवाना
सारे बिस्तर ठीक होने... सब एक साथ ।

मास्टर नहीं, एक तरह की घरेलू नौकरानी ।


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हिंदी समय में स्नेहमयी चौधरी की रचनाएँ