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कविता

जोखिम का शब्द
नरेंद्र जैन


क्या है जो
शब्द है कहीं
लेकिन अनुभव नहीं
जोखिम का शब्द है यहाँ
पर जोखिम कहाँ
कितनी मुश्किल से पहुँचा
मैं भाषा तक यहाँ
और अब कितनी आसानी से
भाषा को चलाता हूँ
मैं इस तरह
एक षड्यंत्र करता भाषा में
ऐसा लगता है
मेरे बच्चे
पढ़ते हैं एक निचुड़ी हुई भाषा
वे होते हैं बड़े
एक बासी पाठ्यक्रम को लादे-लादे
वे देखते हैं
इतिहास के खोखले चित्र
और विस्मय में डूब जाते हैं


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हिंदी समय में नरेंद्र जैन की रचनाएँ



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