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व्यंग्य

चीन से कौन डरता है
राजकिशोर


'चीन से कौन डरता है? कम से कम भारत तो नहीं।' अड्डे पर आते ही यह घोषणा कर सुंदरलाल अपनी पसंदीदा सीट पर बैठ गए और चाय आने का इंतजार करने लगे।

रामसराय को यह बात पसंद नहीं आई। उन्होंने तुरंत टोका, 'क्या इसलिए कि भारत सरकार ने यह कह दिया है कि भारत की जमीन से चीन-विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी?'

सुंदरलाल - यह तो भारत की भलमनसाहत है। वह नहीं चाहता कि चीन और भारत के संबंध बिगड़े।

सपना - तो क्या भारत में किसी भी अन्य देश के विरुद्ध गतिविधि करने के लिए भारत सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है?

अनवर - विदेश मंत्रालय का आशय कुछ और था। उसका कहना है कि हम इस तरह की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

रामसहाय - तो क्या विदेश मंत्रालय ने उन देशों की सूची प्रकाशित कर दी है जिनके खिलाफ भारत में गतिविधियाँ की जा सकती हैं?

सुंदरलाल - आप भी गजब करते हैं! क्या कोई भी देश ऐसी सूची प्रकाशित करता है?

सपना - तो फिर इस संदर्भ में चीन का नाम अलग से लेने की क्या जरूरत थी? यह तो तिब्बत में दमन की कार्रवाइयों का विरोध करनेवालों को धमकाना हुआ।

अनवर - भारत में अगर तिब्बतियों के मानव अधिकारों के समर्थन में आंदोलन होता है, तो वह चीन-विरोधी गतिविधि कैसे हो गई?

सपना - लेकिन भारत में अमेरिका-विरोधी गतिविधियों पर तो कोई रोक नहीं है। स्वयं सरकार के सहयोगी वामपंथी दल निरंतर अमेरिका की आलोचना करते रहते हैं।

सुंदरलाल - अमेरिका की बात और है। वह साम्राज्यवादी देश है।

सपना - क्या भारत सरकार ने इस बात को मान लिया है? या वह वामपंथियों से डरती है?

सुंदरलाल - भारत सरकार किसी से नहीं डरती। यहाँ तक कि वह भारत की जनता से भी नहीं डरती।

रामसहाय - अगर अमेरिका साम्राज्यवादी देश है, तो चीन भी तो साम्राज्यवादी देश है। उसने हमारी बहुत सारी जमीन हड़पी हुई है। हमारी संसद का सर्वसम्मत प्रस्ताव है कि जब तक हम चीन के कब्जे से एक-एक इंच जमीन छुड़ा नहीं लेंगे, चैन से नहीं बैठेंगे। इसके बावजूद चीन अब भी अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोंकता रहता है। उसने तिब्बत पर हमला कर उसे चीन में मिला लिया। अरसे से वह तिब्बती लोगों के मानव अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।

सपना - सावधान, आप चीन के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं। सीपीएम ने इस मामले की नजाकत सभी भारतीयों को बता दी है।

अनवर - फिर तो गुजरात में जो कुछ हुआ, वह भारत का आंतरिक मामला है। दुनिया भर के लोगों को गुजरात में मुसलमानों के कत्ले-आम पर टिप्पणी करने का क्या हक है?

अभी तक चुपचाच बैठे कपूर साहब को हँसी आ गई। वे बोले - मेरे एक दोस्त का कहना है कि घरेलू हिंसा विरोधी कानून संवैधानिक नहीं है, क्योंकि यह पति-पत्नी के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप है। पुलिस को क्या मतलब कि श्री शर्मा श्रीमती शर्मा के साथ क्या करते हैं।

रामसहाय - बिलकुल ठीक। इस तर्क से तो रंगभेद भी अमेरिका का आंतरिक मामला है। उसके बारे में अमेरिका के बाहर इतना क्यों लिखा जाता है?

सुंदरलाल - आप लोग बात को कुछ ज्यादा ही खींच रहे हैं। भारत सरकार ने बयान तो दे दिया है कि इस मामले में शामिल सभी पक्ष बातचीत से और अहिंसक तरीके अपनाते हुए समाधान निकाल लें।

अनवर - यह सलाह चोट खाते हुए तिब्बतियों को है या चोट करनेवाली चीन सरकार को?

सुंदरलाल - दोनों को। भारत को हिंसा का रास्ता पसंद नहीं। नक्सलवादियों, मजदूरों और किसानों की बात हो, तो बात अलग है।

रामसहाय - सचमुच भारत तिब्बत के मामले में बहुत संजीदा दिखाई दे रहा है! उसी तरह जैसे वह म्यांमार में जन विद्रोह के मामले में बहुत संजीदा था! दुनिया में कहीं भी अन्याय हो, यह उसे पसंद नहीं।

सपना - लेकिन अमेरिका? उसने भी तो तिब्बत के आंदोलनकारियों का पक्ष नहीं लिया। क्या वह भी चीन से नहीं डरता?

अनवर - नहीं, वह चीन से क्यों डरेगा? वह तो बार-बार कहता है कि चीन में मानव अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

कपूर - चीन में, पर तिब्बत में नहीं। वहाँ मानव अधिकारों का हनन हो सकता है।

सुंदरलाल - तिब्बत भी तो चीन का ही हिस्सा है।

सपना - लेकिन यह बात तो तिब्बती लोगों से पूछनी चाहिए कि वे चीन का हिस्सा हैं कि नहीं? कोई किसी को उसकी इच्छा के विरुद्ध अपना हिस्सा कैसे बता सकता है?

सपना - जैसे इराक के लोगों से पूछे बिना अमेरिका उनका उद्धार करने पहुँच गया!

सुंदरलाल - तो क्या आप चाहती हैं कि अमेरिका अपनी फौज ले कर ल्हासा पहुँच जाए?

सपना - यह तो तब होगा जब अमेरिका चीन से डरने लगेगा। अभी ऐसी कोई बात नहीं है।

अनवर - यानी अमेरिका भी चीन से नहीं डरता!

'कुल मिला कर साबित यह हुआ कि चीन से अगर कोई नहीं डरता, तो वे तिब्बत के लोग हैं!' यह युवा पत्रकार सुजाता की आवाज थी, जो हमारे अड्डे पर अनवर के साथ पहली बार आई थी।


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