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कविता

कुछ काम था क्या आपको
दिविक रमेश


वह कोई दूसरा आदमी था
जो कल मिला था आपसे

अरे अरे चौंकने से नहीं चलेगा काम
विश्वास कीजिए
इसके सिवा चारा कोई है भी नहीं आपके पास

था तो मैं ही
नहीं नहीं, नहीं था कोई और मेरा प्रतिरूपी
था तो मैं ही
यानी मेरी ही आकृति
पर था वह कोई दूसरा ही आदमी

कल जो मिला था
वह एक जरूरतमंद था, घोंचू, घिघयाया
उसे चाहिये थी आपकी दया, कृपा आदि आदि

आज यह जो आपके सामने है
उसे तो आप तक की जरूरत नहीं है

फिर भी
कहिये कुछ काम था क्या आपको

 


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