hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

गुलामी
रघुवीर सहाय


मनुष्य के कल्याण के लिए
पहले उसे इतना भूखा रखो कि वह और कुछ

सोच न पाए
फिर उसे कहो कि तुम्हारी पहली जरूरत रोटी है
जिसके लिए वह गुलाम होना भी मंजूर करेगा
फिर तो उसे यह बताना रह जाएगा कि
अपनों की गुलामी विदेशियों की गुलामी से बेहतर है
और विदेशियों की गुलामी वे अपने करते हों
जिनकी गुलामी तुम करते हो तो वह भी क्या बुरी है
तुम्हें रोटी तो मिल रही है एक जून।

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में रघुवीर सहाय की रचनाएँ