डाउनलोड मुद्रण

अ+   अ-

कविता

कातिक का पयान
त्रिलोचन


कातिक पयान करने को है, उठाया है
दाहिना चरण, देहरी को लाँघ आया है,
लेकिन अँगूठा अभी भूमि से लगा नहीं,
ऊपर ही ऊपर है, जैसे जगा नहीं।

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में त्रिलोचन की रचनाएँ