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कविता

विनिमय
त्रिलोचन


अजाने जाने का अभिनय चला था नियम से,
चलेगा आगे भी, जन जन इसे जान कर ही
करेंगे भावों का विनिमय, नहीं और पथ है;
लड़ाई आत्मा को कुचल कर ही शक्ति प्रद हो।

 


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हिंदी समय में त्रिलोचन की रचनाएँ