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कविता

तुम्हें जब मैंने देखा
त्रिलोचन


पहले पहल तुम्हें जब मैंने देखा
सोचा था
इससे पहले ही
सबसे पहले
क्यों न तुम्हीं को देखा

अब तक
दृष्टि खोजती क्या थी
कौन रूप क्या रंग
देखने को उड़ती थी
ज्योति-पंख पर
तुम्ही बताओ
मेरे सुंदर
अहे चराचर सुंदरता की सीमा रेखा

 


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हिंदी समय में त्रिलोचन की रचनाएँ