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कविता

स्नेह मेरे पास है
त्रिलोचन


स्नेह मेरे पास है, लो स्नेह मुझसे लो

         चल अँधेरे में न जीवन दीप ठुकराओ
         साँस के संचित फलों को यों न बिखराओ
         पत्थरों से बंधु अपना सिर न टकराओ
मेघमेला विश्व है लो राग मुझसे लो

         यह मरुस्थल है, कहाँ जल है पथिक प्यासे
         दृष्टि-भ्रम है, मौन मृगजल है, थके तासे
         शक्ति खो मत दो भटक कर व्यर्थ आशा से
भूमि में जल है, उठो, लो शक्ति मुझसे लो

         तुम तिमिर-रंजित नयन से देख क्या पाए
         बंधु भी यमदूत बन कर आँख में आए
         कहो, कब तक रहोगे, उद्भ्रांत, अलगाए
प्राण का अवलंब लो विश्वास मुझ से लो

 


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