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कविता

नदी : कामधेनु
त्रिलोचन


नदी ने कहा था : मुझे बाँधो
मनुष्‍य ने सुना और
तैरकर धारा को पार किया।

नदी ने कहा था : मुझे बाँधो
मनुष्‍य ने सुना और
सपरिवार धारा को
नाव से पार किया।

नदी ने कहा था : मुझे बाँधो
मनुष्‍य ने सुना और
आखिर उसे बाँध लिया
बाँध कर नदी को

मनुष्‍य दुह रहा है
अब वह कामधेनु है।

 


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