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कविता

एक मुकुट की तरह
केदारनाथ सिंह


पृथ्वी के ललाट पर
एक मुकुट की तरह
उड़े जा रहे थे पक्षी

मैंने दूर से देखा
और मैं वहीं से चिल्लाया
बधाई हो
पृथ्वी, बधाई हो !

 


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हिंदी समय में केदारनाथ सिंह की रचनाएँ