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कविता

उपदेश बरक्स चुप्पी
अनंत मिश्र


वे जो उपदेश दिया करते हैं
उनके ऊपर
दिखता तो नहीं
पर गँजा रहता है
बोरे का बोरा
शास्त्र,
किताबों का
कचरा
जिसे हजम कर
वे उसका
सब प्रतिफल बाँट दिया करते हैं।
मैं चुप रहता हूँ
मुझे सूझता नहीं
किनारा,
लौट कर आता हूँ
और धीरे-धीरे
फिर से जीवन की
आग जलाने की
कोशिश में लग जाता हूँ।

 


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