hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

मनुष्य-लीला
चंद्रेश्वर


हम बार-बार उजड़ते हैं
तो बसने की कहानियाँ भी दुहराते हैं
बार-बार
ये और कुछ नहीं बस
लीला है मनुष्य की
अपरंपार !

 


End Text   End Text    End Text