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कविता

सखियाँ
अरुण कमल


माथे पर जल भरा गगरा लिए
ठमक गई अचानक वह युवती

मुश्किल से गर्दन जरा-सी घुमाई
दायाँ तलवा पीछे उठाया
और सखी ने झुक कर
             खींचा रेंगनी काँटा

और चल दी फिर दोनों सखियाँ
माथे पर जल लिए

 


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