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कविता

दृष्टिकोण
जितेंद्र श्रीवास्तव


वह डूबा है जिसके सपनों में
उसके सपनों के आस-पास भी नहीं है वह
फिर भी उसका मन
सूरजमुखी का फूल बना
एकटक ताक रहा है उसी ओर

वह जानता है हिसाब-किताब
यह भी कि
मन के इस गणित में उसे हासिल हो शायद शून्य ही
फिर भी वह नहीं छोड़ना चाहता अपना सपना
नहीं बदलना चाहता दृष्टिकोण


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