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कविता

गणतंत्र
शैलजा पाठक


 
चिरई गाँव के प्राथमिक पाठशाला
में बच्चे सफाई में जुटे हैं
ईटा पे गेरू लगा कर सब साफ सूफ
कल गनतंत्र पर सभी को
एक लड्डू एक समोसा देने वाले हैं

सबसे परेशान मिसिर गुरु जी हैं
रंगारंग कार्यक्रम की जिम्मेवारी है उन पर
अब कोई लड़की ये साल भारत माता
बनने को तैयार नही
अब उन्हीं को केंद्र में रख कर
सारी बात सारा शपथ लेना है

लड़कियों ने निर्णय ले लिया है
हर साल का मजाक है
कभी भारत माता को टूटा हुआ दिखाना है
कभी झुका हुआ कभी चोट खाया कभी रक्तरंजित
कभी तार तार अस्मिता इस बार एक साँवली लड़की
को भारत माता बनाते तो फीलिंग उभर कर आता
पर इस बार लड़कियों की फीलिंग जाग गई है

नहीं गुरु जी कल हम सब नही आएँगे
अम्मा तो कहती रही भारत माता को
खूब चटक पीली साड़ी में खूब गहना पहनाकर
ये बड़ा टीका लगाकर सब रंग-बिरंगा नाच करते थे
हमें भी खूब नाचना है पाउडर लाली लगा कर

उस तीन रंग के नीचे रंग रंग हो जाना है गुरु जी...
 


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