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कविता

थक्का
ईमान मर्सल


(पिता के लिए लिखी कविता सीरिज से नौ कविताएँ)

1.

सोते हुए
वे अपने होंठ कुतर रहे
उस क्रोध को दबाते हुए जिसे वह याद नहीं कर सकते
बहुत गहरे सो रहे हैं
जिन हाथों ने उनके सिर को थाम रखा है
उनके कारण वे किसी सैनिक-से दिख रहे
आधी रात ट्रकों में ऊँघते हुए
जैसे कि उन्होंने आँखें मूँद ली हो
दृश्यों की इतनी भीड़ से,
अपनी रूहों को भँवर की तरह घूमने देते
जब तक कि वे फरिश्तों में न बदल जाएँ

2 .
ईसीजी

मुझे डॉक्टर बनना चाहिए था
ताकि मैं अपनी आँख से पढ़ सकूँ ईसीजी
और तय कर सकूँ कि
थक्का महज बादल होता है
जिसे अगर पर्याप्त गर्मी दी जाए
तो वह साधारण आँसुओं की तरह बरस पड़ेगा
लेकिन मैं किसी काम की नहीं
और मेरे पिता
जो अपने बिस्तर पर सो नहीं पाते थे
इस चौड़े हॉल में स्ट्रेचर पर कितना डूबकर सो रहे

3 .
चीख

तुम तक जाता है जो गलियारा
वह खामोश औरतों से भरा हुआ है
वे कंठ पर जमा जंग को खुरचने की रस्म निभा रहीं
जब वे समवेत चीखेंगी
देखेंगी, कितनी दूर तक गई उनकी चीख

4 .

यह अच्छा है
तुमसे अगले बेड पर जो था
लोगों के कंधे उसे कब्रस्तान तक ले गए हैं

यह अच्छा है तुम्हारे लिए
एक ही कमरे में
एक ही रात
मौत दुबारा नहीं आ सकती

5 .
पोर्ट्रेट

हर डग जो भरा था मैंने, उसकी लय पर धड़कता था उनका दिल
उन्हें अब हम सिर्फ एक परिचित, बुझी हुई
सुगंध की तरह याद करेंगे
गर्मियों में मेरा शॉर्ट्स पहनना शायद उन्हें पसंद नहीं था
और मेरी कविताएँ भी
जिनमें कोई छंद नहीं, संगीत नहीं
लेकिन एक से ज्यादा बार देखा था मैंने उन्हें
भौचक
हुल्लड़ मचाते मेरे दोस्त अपने पीछे जो धुआँ छोड़ जाते
उसके बीच खुशी के मारे लगभग गश खाया हुआ

6 .
समानता

मैं पोएट्री इन ट्रांसलेशन* खरीद सकूँ इसके लिए
चिरनिद्रा में लीन इस शख्स ने मुझे यकीन दिला दिया था
कि उसकी शादी की अँगूठी अब उसकी उँगलियों में बहुत ज्यादा कसने लगी है
जब हम जौहरी की दुकान से बाहर निकले
वह लगातार मुस्करा रहा था
इस बात पर भी, जब मैंने कहा
तुम्हारी नाक मेरी नाक से बिल्कुल नहीं मिलती

(*विश्व कविता के अनुवाद की चर्चित पत्रिका , जो कि काफी महँगी भी है।)

7 .
तुम्हारी मौत की खबर

मैं तुम्हारी मौत की खबर इस तरह सुनूँगी
जैसे मेरे साथ किया गया तुम्हारा आखिरी अन्याय
मुझे सुकून नहीं मिलेगा जैसा कि मैंने सोचा होगा
और मैं यह यकीन कर लूँगी कि
तुमने मुझे उस फोड़े के इलाज का मौका नहीं दिया
जो हम दोनों के बीच पनप गया था
सुबह
मैं अपनी सूजी हुई पलकों पर अचरज करूँगी
इस बात पर भी कि
मेरे कंधे अब और झुक गए हैं.

8 .
तुमने हवास खो दिए

मैं अपने बाल पीछे बाँध लेती हूँ
उस लड़की जैसा दिखने की कोशिश करती हूँ
जिसे एक समय तुम बहुत लाड़ करते थे
बरसों, घर लौटने से पहले
मैं बीयर से धोती थी अपना मुँह
तुम्हारी मौजूदगी में मैंने कभी खुदा का जिक्र तक न किया
ऐसा कुछ नहीं तो तुम्हारी माफी के काबिल हो
तुम बहुत दयालु हो, लेकिन निश्चित ही उस समय तुमने अपने हवास खो दिए होंगे
जब तुमने मुझे यह यकीन दिला दिया था
कि ये दुनिया एक गर्ल्‍स स्कूल की तरह है
और टीचर की लाडली बनी रहने के लिए
मुझे अपनी इच्छाओं को एक किनारे रखना होगा

9 .
उदासीनता

सुन्न कर देने वाले झूठों से मैं अपने हाथ धोऊँगी
और उनकी आँखों के सामने ही उस मिट्टी को तपाऊँगी,
जिससे मैंने उनके सपनों का आकार बनाया था
वह
अपनी छाती के बाईं ओर इशारा करेंगे
और मैं

नर्सों जैसी उदासीनता के साथ अपना सिर हिलाऊँगी
कोमा खत्म होने से पहले ही
उन्हें यह महसूस कर लेना चाहिए
कि मरने की उनकी इच्छा
परिवार की दरारों को ढाँप नहीं सकती


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