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कविता

बंधन
आभा बोधिसत्व


हेनरी फोर्ट ने कहा -
बंधन मनुष्यता का कलंक है,
दादी ने कहा -
जो सह गया समझो लह गया,
बुआ ने किस्से सुनाए
मर्यादा पुरुषोत्तम राम और सीता के,
तो माँ ने
नइहर और सासुर के गहनों को बेंच कर से फीस भरी
कभी दो दो रुपये तो
कभी पचास-पचास भी।
मैने बंधन के बारे में बहुत सोचा
फिर-फिर सोचा
मै जल्दी जल्दी एक नोट लिखती हूँ,
बेटा नींद में बोलता है,
माँ मुझे प्यास लगी है।

 


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